एक संक्षिप्त परिचयः राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी अंचल में स्थित "श्री अमृतनाथ आश्रम" एक पवित्र समाधि स्थल और तपस्वी साधुओं का भव्य आश्रम है जहाँ आने वाले भक्तों और साधुओं को मानसिक एंव आत्मिक शांति का आभास होता है। आश्रम का शांत वातावरण और परिवेश लोगों को स्वर्ग के समान प्रतित होता है। गुरु गोरक्षनाथ सम्प्रदाय में अग्रणी,मन्नाथी पंथ के इस आश्रम ने समाज को अनेक महान सन्त दिए है,जिन्होंने इस आश्रम का ही नहीं बल्कि किसी न किसी समय मन्नाथी पंथ के प्रायः सभी आश्रमों का संचालन किया है तथा इनके द्वारा निरन्तर समाज कल्याण के कार्य होते रहे है।
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने योगाप्रचार के लिए गुरु गोरक्षनाथ का रुप धारण किया था। इसी प्रकार योगाचार्य गुरु गोरक्षनाथ ने "सहजयोग" तथा आहार-विहार के ज्ञान द्वारा मानव जीवन के कल्याण हेतु विलक्षण अवधूत बाबा श्री अमृतनाथ जी महाराज का रुप धारण किया, ऐसा उनके अनुयायी मानते है। बाबा श्री अमृतनाथ जी महाराज ने 24 वर्षों तक जंगलों में रहकर आहार-विहार तथा योग साधना से संबंधित प्रयोग अपने शरीर पर किये।
"सुधरे आहार-विहार तव होवे वृत्ति पवित्र।
रोगमुक्त काया रहे,'अमृत' विमल चरित्र॥"
इसी क्रम में परम पूज्य पीर श्री ज्योतिनाथ जी महाराज,योगीराज श्री शुभनाथजी महाराज,कृपा सिन्धु श्री हनुमाननाथ जी महाराज तथा वर्तमान पीठाधीश्वर महन्त श्री नरहरिनाथ जी महाराज ने भी इस अन्वेषण और अनुसंधान की परंपरा को जारी रखा है और अपने मार्गदर्शन और उपदेशों से हजारों श्रद्धालुओं का चरित्र उज्ज्वल बनाया है। आप एक सात्विक,अनुशासित,दृढ़निश्चयी एंव सम्पूर्ण कर्मयोगी हैं,जिन्होंने गुरुओं के वचनों पर चलते हुए अन्य बातों के अलावा समाज में फैली कुरीतियों एंव रुढ़ियों पर आघात किया है तथा सन्त समाज एंव अनुयायिओं के जीवन को अपने द्वारा अर्जित ज्ञान से प्रकाशित किया है।