आश्रम के बारे में


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संरचना

शाखाएँ कार्यक्रम आश्रम कैसे पहुंचे?
दिल्ली से 320 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है राजस्थान राज्य का छोटा सा शहर फतेहपुर शेखावटी। यह क्षेत्र अपनी कला-कृतियों और सुन्दर हवेलियो के कारण विख्यात है, वन्य संपदा के मामले में भी यह क्षेत्र काफी समृद्ध है। खासतौर पर यहाँ तोता, मयूर, सफेद बाघ और नीलकंठ की विभिन्न किस्मों के अलावा अन्य खुबसूरत प्रजातियों की भी बहुतायात है, इसी फतेहपुर शेखावटी में स्थित है- श्री अमृतनाथ आश्रम।
यह आश्रम बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, और इसके आस-पास का प्राकृतिक परिवेश भी हरा-भरा और सुन्दर है। मरूभूमि में यह स्थल स्वर्ग जैसा लगता है। श्री अमृतनाथ जी, श्री ज्योतिनाथ जी, श्री शुभनाथ जी और श्री हनुमाननाथ जी की समाधियाँ इस आश्रम में हैं। सफेद संगमरमरी पत्थरों से चमकते ये समाधि मंदिर इस स्थान की सुन्दरता को और भी बढ़ते है। इसके पास ही स्थित है निरंतर प्रज्ज्वलित रहने वाली श्री अमृतनाथ जी का धूना। यही वो स्थान है जहाँ अमृतनाथ जी ने समाधि लेने के पूर्व के चार वर्ष बालू की शय्या पर बिताये थे। इस समाधि स्थल के सामने एक बड़ा सा नवनिर्मित कक्ष है जो बाबा अमृतनाथ जी के जीवन तथा उनकी लीलाओं का वर्णन करने वाले चित्रो से सुसज्जित है। इसी कक्ष में लोग आकर ध्यान लगाते हैं और यहीं पर सुबह तथा शाम की आरती होती है। इस कक्ष की छ्त पर लगे सुन्दर आईने की कलाकारी सभी आनेवालों को अच्छी लगती है।
यहाँ का पवित्र वातावरण लोगों के मन मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है। वर्तमान काल में इस आश्रम में सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक सौ कमरे है। आश्रम के पास कृषि के लिये विस्तृत भू-खण्ड है। यहां रहने वालों और यहां आने वालों के भोजन के लिए अधिकतर अनाज तथा सब्जियां यहां उगाई जाती है आश्रम का आत्मनिर्भता की ओर निरंतर प्रयास रहता है। यहां प्राकृतिक तरीके से गेहूँ, बाजरा, चना जैसे अनाजों तथा सब्जियों की खेती की जाती है। प्राकृतिक तरीके से उत्पन्न अनाज और सब्जियों द्वारा तैयार और भंडार द्वारा परोसे गये खाने का आनंद यहाँ आने वाला हर मेहमान उठाता है। आश्रम की अपनी गायें है। इनके दूध से बने दही और मठ्ठे के साथ बाजरे की रोटी यहां आने वाले मेहमानों का पसंदीदा नाश्ता है।
आश्रम का सामाग्रिक वातावरण और परिवेश स्वर्ग के समान है। शहर की भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर यहाँ का परिवेश लोगों के दिलो-दिमाग को तरोताजा करता है और उन्हें आत्मिक शांति प्रदान करता है।
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